बुधवार, 26 मई 2010

इंसाफ की उम्मीद ......

रूचिका केस में राठौर को की सजा बढाये जाने से उन लोगो को कुछ राहत मिली होगी जिनका कानून व्यवस्था पर से भरोसा समाप्त हो चला है ।अदालत के इस फैसले से उसके परिजन खुश है कि उन्हे इंसाफ मिला पर सोचने वाली बात तो यह है आखिर 1990 में 15 वर्षीय बालिका के साथ राठौर ने छेडछाड की वह भी जो कि खुद पढे लिखे है कहते है इन्सान के अन्दर जानवर होता है उनका जानवरपन जगा क्या हासिल हुआ एक प्रतिभा जो शायद समाज को क्या कुछ देती दुनिया से चली गयी वह क्यों रहती ऎसे समाज में जहां उसके साथ ऎसा हुआ जब रक्षक ही भक्षक बन जाये तो क्या समक्षे लोग ? उस पर उन्हे अपने इन कारनामों पर कुछ फर्क नही पडता क्या पढ लिख कर वह इसलिए डीजीपी एसपीएस बने ताकि ऎसे शर्मनाक काम करे वह भी नाबालिक के साथ,कुछ ही समय बाद उसे आत्महत्या करने पर मजबूर होना पडा, क्या बीतती है ऎसे माता-पिता व परिजनों पर जब उनकी बच्चियों के साथ ऎसा होता है । 20 साल चली इस लडाई मीडिया का अहम रोल रहा । अभी लोग आश्वस्त नही कि राठौर को सचमुच जेल जाना पडेगा वह कुछ न कुछ विकल्प ढूढ ही लेगे । शिक्षित व्यक्ति ऎसे कार्य करे तो वह माफी के काबिल है भी नही उसका गुनाह कम नही जो सजा अदालत ने उसे सुनायी है वह बहुत कम है समाज में रहने वाले एसे लोगो ऎसी सजा मिलनी चाहिए कि वह अपनी पद शक्ति का दुरूपयोग न कर सके और यह न समझे कि वह कुछ भी करने के लिए स्वतंत्र है कानून सभी के लिए बराबर है । तभी उन लडकियों में भी हिम्मत हौसला आयेगा जीवन में आगे बढने का साहस कर पायेगी ।नही तो कोई न कोई राठौर उनसे उनके जीवन का हक छीन उन्हे आत्म हत्या करने पर मजबूर कर देगा हमारी बच्चियों का हौसला न टूटे। इसके लिए कानूनों में सख्ती व बदलाव की भी आवश्यकता है नही तो क्या फायदा उन कानूनों का जो गुनाह करने वालो का ही हिमायती बने? उम्मीद है मीडिया इस तरह की मुहिम जारी रखे ताकि उन लोगो को इंसाफ मिल सके जिन्हे अपने पद व शक्ति के रोब की धोस दिखाते लोग कमजोर लोगो को दबाते है ।

15 टिप्‍पणियां:

Riku Sirvya ने कहा…

रूचिका केस में राठौर को ना के बराबर सजा मिली,वह भी 20 साल बाद। आपको क्‍या लगता है कि मीडिया आम लोगों के लिए इस तरह की लड़ाई लड़ सकती है मीडिया अपनी टीआरपी बढ़ने के चक्‍कर में धूमती है।देश में कितनी रूचिकाएं है जिनके साथ इससे भी ज्‍यादा होता है मीडिया कभी नहीं वहां जाती । जितना इंसाफ मिला वह अच्‍छा है देश में कोई ऐसा कानून होना चाहिए कि इस तरह के लोगों को अपराध सिद्ध होने के प्रथम स्‍टेज के बाद आगे की अदालतों में अपनी अर्जी लगाने का मौका उस अदालत की सुनाई सजा का एक तिहाई सजा भुगतने के बाद फरयाद लगाने की अनुमति हो।

Riku Sirvya ने कहा…

रूचिका केस में राठौर को ना के बराबर सजा मिली,वह भी 20 साल बाद। आपको क्‍या लगता है कि मीडिया आम लोगों के लिए इस तरह की लड़ाई लड़ सकती है मीडिया अपनी टीआरपी बढ़ने के चक्‍कर में धूमती है।देश में कितनी रूचिकाएं है जिनके साथ इससे भी ज्‍यादा होता है मीडिया कभी नहीं वहां जाती । जितना इंसाफ मिला वह अच्‍छा है देश में कोई ऐसा कानून होना चाहिए कि इस तरह के लोगों को अपराध सिद्ध होने के प्रथम स्‍टेज के बाद आगे की अदालतों में अपनी अर्जी लगाने का मौका उस अदालत की सुनाई सजा का एक तिहाई सजा भुगतने के बाद फरयाद लगाने की अनुमति हो।

Riku Sirvya ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Sunita Sharma ने कहा…

आपने ठीक ही लिखा है पर मीडिया की ताकत से आप परिचित होगे सिर्फ मीडिया टीआरपी ही बढाने के चक्कर में ही घुमें तो गलत है यदि हर वर्ग अपने कार्य को इमानदारी से करे तो तो ही ठीक है पर ईमानदारी व आदर्शो को मानने वालो को बहुत कठिनता होती है लेकिन जीत सच्चाई की ही होती है मीडिया इस तरह की लडाई लड सकती है इसे मिशन के रूप में मानने वाले आज भी है कानूनों में फेर बदल बेहद जरूरी है इस दिशा में गम्भीरता से सोचना होगा।

zeal ने कहा…

Rathod killed a girl, destroyed a talent, Devastated a family and he lived his cream years fully.

Only 18 months punishment after 19 years of fight?

tofee dekar bachha behla diya.

I'm not at all satisfied with the judgement.

Rathod type of faggots should be hanged till death.

SACCHAI ने कहा…

" bahut hi badhiya aalekh ..mai riku sirvya se sahemat hu "

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

Sonal ने कहा…

bahut hi acha lekh hai..

A Silent Silence : Chandani khil ke kamal..(चांदनी खिल के कमल..)

Banned Area News : By 2030, India's diabetes population will reach 79 mn

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

आरजू़ चाँद सी निखर जाए,
जिंदगी रौशनी से भर जाए,
बारिशें हो वहाँ पे खुशियों की,
जिस तरफ आपकी नज़र जाए।
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।

VIJAY KUMAR VERMA ने कहा…

आपको व आपके परिवार को भी दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें।

विजय तिवारी " किसलय " ने कहा…

विस्तृत विवरण के साथ लिखा आलेख सकारात्मक है
- विजय तिवारी "किसलय" जबलपुर
<a href="http://hindisahityasangam.blogspot.com/2010/12/blog-post.htmla>

kshama ने कहा…

Bahut damdaar aalekh hai.Medea se kayi baar kewal nirasha palle padtee hai.Aur jaisi ke kahawat hai, Justice delayed is justice denied...yahan to saza bhi na ke barabar mili! Kya kahen??Dil tadap ke rah jata hai.

राजीव थेपड़ा ने कहा…

kaash ki ham sab ghar se baahar aakar bhi koi koshish kar saken....kaash ki ham itne dol jaayen kabhi ki baahar nikalne ke sivaay koi aur chaara hi naa bache,,,!!!

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

सार्थक चर्चा ....
गहन चिन्तनयुक्त विचारणीय लेख .....

ज्योति सिंह ने कहा…

नही तो कोई न कोई राठौर उनसे उनके जीवन का हक छीन उन्हे आत्म हत्या करने पर मजबूर कर देगा हमारी बच्चियों का हौसला न टूटे। इसके लिए कानूनों में सख्ती व बदलाव की भी आवश्यकता है नही तो क्या फायदा उन कानूनों का जो गुनाह करने वालो का ही हिमायती बने? bilkul sahi kaha ,vicharniye lekh

GathaEditor Onlinegatha ने कहा…

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