बुधवार, 27 जनवरी 2010

यह राह कैसे तय कर पाऊ.............?

क्या राह मुश्किल होती है....................?
सत्य पथ पर चलने वालो
की उम्मीदें धुमिल होती है
आसान नही रास्ते खोजे नही मिलती मंजिल
चटटानों को भेद सके वो हिम्मत कहां से पाऊ
अन्जान डगर पर चलने की 

कीमत कैसे चुकाऊ........................?
जो हम सोचे जो हम चाहे 
तकदीर क्या वो देती है
जितना पास हमारे छिनने 
के डर से घबराते है..........................?
पग-पग कांटों से कैसे पार पाऊ
जाना जहां मुझे वो जहां कैसे पाऊ
सफेद रास्तो से कहो मुझे न बुलाए
अभी सफर शुरू किया अन्त कहां से पाऊ.........................?
दूर गगन पर रहने वाले
तेरा दामन कैसे छोडू
एक तू ही मेरी मंजिल है
तू बता अब यह राह कैसे तय कर पाऊ.........................?

10 टिप्‍पणियां:

smsinhindi.com ने कहा…

Sunita ji, its a beautiful poem. keep writing such beautiful poems.

Murari Pareek ने कहा…

बहुत अच्छी कविता है मन मोहक!!!

Murari Pareek ने कहा…

सही है तकदीर देती कम है लेती ज्यादा है !!!

kshama ने कहा…

Behad sundar rachana hai!Sach ke rastepe chalke apnee manzil pana bada kathin kaam hai..aapko yash mile yahee dua hai!

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत अच्छी कविता है

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

अच्छी कविता.

VIJAY TIWARI " KISLAY " ने कहा…

कविता के भाव अच्छे हैं परन्तु यह भी सच है कि दृढ संकल्पित होने से कठिन राहें भी आसान हो जाती हैं, सुन्दर अभिव्यक्ति है , उम्मीद है हमें यहाँ पर और भी सुन्दर रचनाएं पढने को मिलेंगी.
- विजय

हृदय पुष्प ने कहा…

"सत्य पथ पर चलने वालो
की उम्मीदें धुमिल होती है"
मुझे भी कुछ ऐसा ही आभास होता है लेकिन विश्वास यही है कि "सत्य पर चलने वालों की हार नहीं होती" सार्थक रचना के लिए बधाई स्वाकारें.

Sunita Sharma ने कहा…

मै आप सभी का तहेदिल से आभार व्यक्त करती हूं जो कमेंट आपने इस रचना के लिए किए यह सब मेरे लिए अनमोल है "बूझते दिए को जरूरत है.....थोडे हौसले की जल गया तो रोशन जग को कर देगा।"

Suman ने कहा…

nice