रविवार, 22 नवंबर 2009

कौन हूं मै........?

कृति हूं मै अनोखी 
रचा है मुझे किन लम्हो में
कौन हूं मै क्या हूं मै ?
आज तक न जान पायी
तलाशती वजूद को 

समझ न पायी 
हां एक रूत्री हूं मै !
बनाती हूं घरौदा प्यार से 
रिश्तें सभांलती सम्मान से 

निगाहें सहती हूं ,तमाम
डाह की,भुख की,वासना की
प्रेम की,फरियाद की,
कौन हूं मै क्या हूं मै ?
आज तक न जान पायी
पीड़ा के घाव छिपाती
सुखी हड्डियों ढेर पर बैठी
ताकती उम्मीद से बच्चों को
कभी तो मां याद आये
जीने का हक मांग ,कुल्टा कहलाती 
त्याग कर सुखो का कर्तव्यों को निभाती
देवी पदवी धारती  !
उडना चाहु तो पंख कहां से पाऊ 
कौन हूं मै क्या हूं मै ?
हां बस एक स्त्री हुं मै................! 

8 टिप्‍पणियां:

अजय कुमार झा ने कहा…

बहुत खूब परिभाषित किया आपने..
अजय कुमार झा

shama ने कहा…

Sabse pahle hame insaan honeki pahchaan chahiye..gar duniya ye samajh jay ki, ham haad maas ke insaan hai, wo sabse badee jeet hogi...saare insaani gun doshonke sahit sweekara jay..na devi na daasi..

समयचक्र - ने कहा…

भावपूर्ण सुन्दर रचना . बधाई

Nirmla Kapila ने कहा…

निगाहें सहती हूं ,तमाम
डाह की,भुख की,वासना की
प्रेम की,फरियाद की,
कौन हूं मै क्या हूं मै ?
आज तक न जान पायी
पीड़ा के घाव छिपाती
सुखी हड्डियों ढेर पर बैठी
ताकती उम्मीद से बच्चों को
कभी तो मां याद आये
एक औरत के दर्द की लाजवाब अभिव्यक्ति शुभकामनायें

Dr. shyam gupta ने कहा…

क्या पुरुष को कोई आज तक पहचान पाया, स्वयम को पहचाने जो वह ही स्त्री को-पुरुष को जाने। संयम, सदाचारण की ही प्रधान बात है न कि स्त्र-पुरुष की।

ज्योति सिंह ने कहा…

bahut pyaari rachna ,hamare astitav ko lekar

वन्दना ने कहा…

ek aurat ke pyar ,man samman aur atitva ke dard ko bakhubi ukera hai.

Sunita Sharma ने कहा…

आप सभी का तहेदिल से आभार व्यक्त करती हूं आपने मेरी रचना को पढा व सराहा।मेरे आलेखों को आप www.himalayauk.org
पर भी पढ सकते है।