बुधवार, 11 नवंबर 2009

बने सुपरवोमैन

बने एक सुपरवोमैन (be a superwoman)
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जब जाना हो चांद पर समय हो टेक्नोलॉजी जब वक्त हो ब्लागिंग का तो या दूसरे अन्य क्षेत्रों का तब आज की नारी क्यों एक ऎसी औरत बने जिसके पास असाधारण शक्तिया हो आज की महिला जो उडाती है जेट प्लेन जाती हो अंतरिक्ष में तब इस दौर मे वक्त नही वह अतीत की स्त्रियों की तरह बने उन्हे बनना है एक ऎसी  सुपरवोमेन  जो हर काम में परफेक्ट हो हर मां को सोचना है कि यदि वह एक लडकी की मां है कि कैसे हर परिस्थिति कैसे निपटना है लडकी होना कोई गुनाह नही एक बेटी को जन्म देना फ्रख की बात है क्योकि जो जननी है को जन्म देना एक सौभाग्य है बस जरूरी है उसको पालना इस तरह से परवरिश करना कि वह हर मुकम्मल परिस्थिति में जी सके मुकाबला कर सके डार्विनवाद वैसे भी योग्यतम ही विजय के सिद्वान्त पर चलता है।नारी सक्षात दुर्गा का अवतार होती है उसे अपनी शारीरिक  मानसिक शक्तियों को पहचानना है उसे जरूरत है समाज के सहयोग की परिवार के सहयोग व स्नेह की व अपने जीवन देने वालों के प्रेम की ताकि हर स्त्री सर उठा जी सके हर आम लडकी एक दिन किरन बेदी,सुनीता विलियम्स जैसी बनने का जज्बा रख सकती है यदि सही माहौल व शिक्षा दी जाये । कहते है महिला ही समाज को बनाती व बिगाडती है।

नेपोलियन ने भी कहा था कि "तुम मुझे अच्छी महिला दो मै तुम्हे अच्छे नागरिक दूँगा।"

 

6 टिप्‍पणियां:

shama ने कहा…

सुनीता जी , अपने उदहारण से कहूँगी , की , ख़ुद मुझे 'super woman' कहा गया , लेकिन जहाँ परिवार का सवाल उठा , हालात ऐसे बने , की , मुझे हरेक चीज़ / प्रताड़ना, सहने के अलावा चारा नही था ...मुझ जैसी मेरे वयो गट में कई महिलाएँ होंगी , जिन्हें ये मानसिक अत्याचार बर्दाश्त करना पड़ा होगा ..जिसका असर शरीर पर भी होता है...


आगे की generation को शायद ( शिक्षित ) को ये न झेलना पड़े , लेकिन , जबतक सामाजिक धारणाओं में बदलाव नही आता , बर्दाश्त कर लेने के अलावा चारा नही ..ज़रूरत है , आधार गृहों की ...यही इस समस्या का हल है . कोशिश इस बात की होनी चाहिए।

Murari Pareek ने कहा…

बहुत सही कहा है अगर सही परिस्थितियाँ हो तो लडकियां किसी से कम नहीं हर कार्य करने की क्षमता रखती हैं

SACCHAI ने कहा…

" sacchai bhari baat kahi hai aapne aur mai shmaji se bhi sahemat hu "

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

Dr. shyam gupta ने कहा…

क्या नेपोलिअन ने अच्छी महिला की परिभाषा दी थी? यही हर सवाल का ज़बाव है। अच्छी महिला या अच्छा पुरुष की बज़ाय अच्छे व्यक्तित्व बनना चाहिये। कोई सामन्जस्य ही नहीं रहेगा।

Dr. shyam gupta ने कहा…

असामन्जस्य

Sunita Sharma ने कहा…

आपने सही कहा कि अच्छा मिला या पुरूष की बजाय अच्छे व्यक्तित्व बनना चाहिए लेकिन मेल फीमेल कुछ नैसर्गिक अन्तर तो अभी बाकी है न आने वाले समय की बात मै नही कर रही हू पर जिस तरह महिलाओं को ही हमेशा परिवार समाज काम सभी में एडजेस्ट करना होता है वही पुरूषों इसमें थोडी अभी अजादी है।

आपकी बात का सन्दर्भ अभी नही समझ आया।

आखिर कब तक सहूगी भाग दो पढिए Emotion's htttp://swastikachunmun.blogspot.com