गुरुवार, 29 अक्तूबर 2009

सवाल सुनीता जी का..

Sunita Sharma said...

शमा जी
अगर एेसी सजा लडके को मिले मेरा मतलब यदि कोई लडकी लडके से प्यार का वादा शादी का वादा कर सम्बन्ध बना कर बाद में इन्कार कर दे तो उस लडकी को क्या सजा मिलनी चाहिए यदि हां तो सजा क्या होती है ?

आपने मुझे इस ब्लाग पर लिखने को कहा था मै लिखना चाहती हुं।

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जवाब सुनीता जी को है ...लड़के के साथ गर कोई लडकी वादा फरामोशी कर जाय तो उसे क्या सज़ा मिलनी चाहिए ..बात सज़ा की नही है , सामाजिक धारणा की है ...लडकी की 'शुचिता ' ही क्यों मायने रखती है...वो शुचिता केवल शारीरिक ही क्यों? बलात्कार की शिकार लडकी कैसे ज़िम्मेदार है ?और अपराध बोध जिसे सहना पड़ता है?
ऐसे वाक़यात केवल एक अपघात के माफिक क्यों नही समझे जाते...सड़क चलते किसी गाडी का धक्का लगा और अपघात हो गया...बस इससे अधिक इसे मानसिक तौर पे एहमियत ही नही मिलनी चाहिए..और एक अपघात के बात अपघात ग्रस्त व्यक्ती का जिस तरह इलाज किया जाता है...एक सहानुभूती पूर्ण रवैय्या इख़तियार किया जाता है...वही ऐसे अपघात के साथ होना चाहिए...नीरज जी ने सही लिखा है...चाहे नौकरी हो या कुछ और हम सामाजिक धारणाओं के बंधन में बंध के सारासार विचार शक्ती खो बैठते हैं...जो सरासर ग़लत है...
KNKAYASTHA "नीरज" said...

मैं "सच्चाई " की टिपण्णी पे टिपण्णी कर रहा हूँ क्योंकि मुझे ऐतराज़ है इस बात से की "लड़की या औरत इस हादसे में अपना सब कुछ खोती है "...

यह समाज में स्थापित ग़लत धारणा है और यह जानबूझ कर बना दिया गया है ... चूँकि समाज ऐसा कहता है की ... इसलिए लड़की या औरत को लगता है की उन्होंने कुछ खो दिया है ...

एक उदहारण ...
क्योंकि सब कहते की जो आज 50,000/- monthly नही कमाता वो successful नही है तो ऐसे लोग depression मे चले जा सकते हैं ...

या ... जो बच्छा 95% नहीं ला पता वो बेकार है ...

या ...

कितने ही उदहारण मिलेंगे ... इसपे विचार अवश्य करें ...

Monday, August 24, 2009

घर की लक्ष्मी...नहीं...एक इंसान बस

5 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

जारी रखे चर्चा...पढ़ रहे हैं.

kshama ने कहा…

सही दिशा में चर्चा चल रही है ...औरत केवल भोग्य वस्तु नही...जिसे झूठा किया और फेंक दिया...ये बेहद घृणित मानसिकता है...बचपनसे ये अपराध बोध लडकी के दिमाग में डाल दिया जाता है..शमा ने जैसे कहा, की, ऐसी घटना केवल एक अपघात के नज़रयी से से देखनी चाहिए,बल्कि शिकायत दर्ज कर कानूनी लडाई अवश्य लड़नी चाहिए...सबक तो सीखे लोग...एक धरी और परिपक्वता का...लडकी को घरमे बंद कर दबाके नही रखना चाहिए...और गर ऐसी लडकी का शादी के बाज़ार में दाम घट जाता है,तो पहले ही ऐसे लड़कों की मानसिकता पता चल जाती है..आगाह हो जाते हैं,की, आगे क्या परोसा जा सकता है..

shyam1950 ने कहा…

सही दिशा में चर्चा चल रही है ...औरत केवल भोग्य वस्तु नही...जिसे झूठा किया और फेंक दिया...ये बेहद घृणित मानसिकता है...बचपनसे ये अपराध बोध लडकी के दिमाग में डाल दिया जाता है..
BILKUL SAHEE BAAT HAI
...SAMANTI YUG KE ACSHESHON KO KYON DO RAHE HAIN HUM ...SABSE MAHATVPOORN JEEVAN HAI JEEVAN ABHI AUR ISI PAL..SAMAJ KO SANSAKARBADH MANSIKTA SE MUKT KAR PANA HAI BADA DUSHKAR KARY ... EK HI SAMADHAN HAI KHUD KO BADAL LO .. VAH BHI ITNA AASAN NAHIN ..

Sunita Sharma ने कहा…

आप सब स्त्रियों के हितों की चिन्ता करते है पर ये क्यों भुल जाते है एक इन्सान की परवरिश पर बहुत कुछ निर्भर करता है चाहे वह स्त्री हो या पुरूष मैने इस ब्लाग के माध्यम से एक सवाल पूछा था किसी ने सही जवाब नही दिया यदि कोई लडकी किसी लडके को प्रेमजाल में रखे शादी का वादा कर मुकर जाये तो एेसी स्थिति में उस लडके को क्या करना चाहिए क्या कानुन की शरण ले यदि इस पर लडका गंभीर रहे वह अपनी बात से किसी भी तरह न हटे?

Sunita Sharma ने कहा…

मै इस ब्लाग के माध्यम से यह सवाल पूछना चाहती हूं कि क्या घरलू हिसा से बचने का तरीका यह है उस व्यक्ति का छोड दो परिवार को छोड दो जो इसका शिकार है जिस मुददे को मैने उल्टा तीर के माध्यम से उठाया बकौल अमित जी जिन्होने यह कि मै इस मुहिम से हटा दिया कि मै इसका हिस्सा कैसे बन सकती हूं क्योकि मै खुद इसका शिकार हूं पलायन से समस्या का हल होता है यह कैसी मुहिम है ?
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