मंगलवार, 13 अक्तूबर 2009


लूट कर चैन


हड़प कर खुशियाँ


आतंकवादी बढ़ रहे हैं .....


और हम हैं कि


शान्ति मार्ग पर


चल रहे हैं .......


- विजय तिवारी "किसलय "

8 टिप्‍पणियां:

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

अरे चंद शब्दों में इतना कुछ? बहुत खूब. हमारी त्रासदी है ये.

M VERMA ने कहा…

बहुत सही -- वास्तव मे आतंकवादियो को तो हम खुद बढा रहे है.

Murari Pareek ने कहा…

बहुत सही कहा पर कोई शांति पथ पर नहीं चलेगा तो पथ अवरुद्ध हो जायेगा घास फूस उग जायेगी ! कोई जान भी नहीं पायेगे की ऐसा भी कोई मार्ग था, और नया मार्ग, वो भी इतना कठिन कौन बनाना चाहेगा!!

SACCHAI ने कहा…

" kum alfaz magar gaherai "

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

shama ने कहा…

सच कहा...हम सभी ' निष्क्रिय' होके देख रहे हैं...ये माहौल हम नही तो और कौन बदलेगा? मै सुझाव दे चुकी हूँ..तरीक़ा अपनाया हुआ है...हम इसी ब्लॉग परके लेखक क्यों न इकट्ठे होके एक PIL दाखिल करें....क़ानून जब तक बदला नही जाता, 'कसाब' जैसी कठपुतलियाँ आतंक मचाती रहेंगी...भारत और पाकिस्तान दोनों मुल्कों में आतंक पनप रहा है...जब तक हमारे देश में धरमवीर commission द्वारा लागू किए 'reforms' अमल में नही आते...आतंक पनपता रहेगा...आईये हाथ मिलाएँ हम सभी...यही एक आवाहन कर सकती हूँ...विनीता आमटे ,शहीद अशोक आमटे की पत्नी एक कानूनी लड़ाई लड़ रही है...कुछ नही तो एक अपील द्वारा ( singnature campaign), उसे सहायता करें..
लेकिन प्रकाश सिंग( IPS) ,जो BSF के अवकाश प्राप्त डीजीपी हैं , कई बरसों से इंडियन Evidence Act २५/२७ में बदलाव लाने के लिए, और commission के सुझाव लागू करने के लिए कानूनी जद्दो जेहद कर रहे हैं...क्या तो नक्सलवादी, ltte, उल्फा, इन संघटनाओं के द्वारा BSF के जवान/ पुलिस ....रोज़ मारे जा रहे हैं....हम केवल टीवी पे एक समाचार के तौरपे उसे देखते हैं...और अपने, अपने जीवन में मशगूल हो जाते हैं..

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

हां सच है. हमें कुछ करने की बजाय केवल खबरें सुनने की आदत हो गई है. दी, यदि आप कोई मुहिम शुरु करना चाहें तो मैं हमेशा आपके साथ हूं.

RAJ SINH ने कहा…

'शमा' जी के सुझाव विचारणीय हैं . क्या कोई पहल हो सकती है ?

Pandit Kishore Ji ने कहा…

chand shabdo me itna kuchh bhai waah