शुक्रवार, 2 अक्तूबर 2009

जंगे आज़ादी...

२ अक्टूबर..... गांधी जयंती है..ये कविता उस महात्मा और उसकी और हमारी माँ को समर्पित है .....जवाब उन लोगों को है, जो आज होती/दिखती हर बुराई के लिए गांधी को ज़िम्मेदार ठहरातें हैं...ये तो हर शहीद पे इल्ज़ामे बेवफ़ाई है...चाहे, गांधी हो, भगत सिंग हो या करकरे, सालसकर, अशोक काम्टे ....

ना लूटो , अस्मत इसकी,
ये है धरती माँ मेरी,
मै संतान इसकी,
क्यों है ये रोती?
सोचा कभी?
ना लूटो...

मत कहो इसे गंदी,
पलकोंसे ना सही,
हाथों से बुहारा कभी?
थूकने वालों को इसपे,
ललकारा कभी?
ना लूटो...

बस रहे हैं यहाँ कपूत ही,
तुम यहाँ पैदा हुए नही?
जो बोया गया माँ के गर्भमे
फसल वही उगी...
नस्ल वही पैदा हुई,
ना लूटो...

दिखाओ करतब कोई,
खाओ सीने पे गोली,
जैसे सीनेपे इंसानी,
गोडसेने गांधीपे चलायी,
कीमत ईमानकी चुकवायी,...
ना लूटो...

कहलाया ऐसेही नही,
साबरमती का संत कोई,
चिता जब उसकी जली,
कायनात ऐसेही नही रोई,
लडो फिरसे जंगे आज़ादी,
ना लूटो...

ख़तावार और वो भी गांधी?
तुम काबिले मुंसिफी नही,
झाँको इस ओर सलाखों की
बंद हुआ जो पीछे इनके,
वो हर इंसां गुनाहगार नही,
ना लूटो...

ये बात इन्साफ को मंज़ूर नही,
दिखलाओ उम्मीदे रौशनी,
महात्मा जगतने कहा जिसे,
वैसा फिर हुआ कोई?
कोई नही, कोई नही !!
ना लूटो...

14 टिप्‍पणियां:

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

बिल्कुल सच की ओर जाती आपकी यह कविता देशभक्ति के बीज बो रही है सच्चाई यही है महात्मा गाँधी जी का योगदान
अविस्मरणीय है जिन्होने सत्य और अहिंसा से आज़ादी दिलाई..

आपकी रचना ..बहुत अच्छी लगी..धन्यवाद शमा जी,

संगीता पुरी ने कहा…

गांधी दिवस के अवसर पर इतनी अच्‍छी रचना के लिए आभार .. गांधी दिवस की शुभकामनाएं !!

M VERMA ने कहा…

जो बोया गया माँ के गर्भमे
फसल वही उगी...
नस्ल वही पैदा हुई,
सही कहा है जो बोया वही तो काट रहे है.

kshama ने कहा…

Sundar rachna...jo tahe dilse k likhee gayee hai!

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना. गांधी जी पर समय-समय पर सवालिया निशान लगते रहे हैं लेकिन उन्होंने देश के लिये क्या किया इस बात का ज़िक्र सवाल उठाने वाले नहीं करते. हो सकता है कि गांधी जी के सिद्धांतों से कोई सहमत न हो लेकिन इसका मतलब गांधी जी द्वारा किये गये आज़ादी के प्रयासों को नज़रान्दाज़ करना नहीं है. सुन्दर श्रद्धान्जलि.

Murari Pareek ने कहा…

बहुत सही कहा शमा जी महात्मा जैसा कहाँ कोई हुआ है !

SACCHAI ने कहा…

" bahut hi acchi rachana ....satyata se bhari ....shi hai aapka kahena ki nazar andaz mat karo GHANDHI ke karya ko ..."





" der se aapne ke liye maafi chahta hu ."



----eksacchai { AAWAZ }

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Amit K Sagar ने कहा…

गांधी जी पर जो सवाल खड़े करते हैं उनके लिए बहुत अछ्स सवाल हैं? काश वो ऊतरित करे?

मैं चाहता हूँ कि लायक लोग अपनी शक्ति को अलग अलग रखकर प्रयोग न करके अगर इक जगह संगठित हो जाएँ तो हम यकीनन सब कुछ कर सकते हैं!

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हिंदी ब्लोग्स में पहली बार Friends With Benefits - रिश्तों की एक नई तान (FWB) [बहस] [उल्टा तीर]

शुभम जैन ने कहा…

bahut sahi kaha....jo khud kuch nahi kar sakte wo karne walo per iljam lagane ka kaam bakhubi karte hai...aapki rachna ek karara jawab hia aise logo ko...


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सर्वत एम० ने कहा…

हम जैसे चंद लोग यही चीखते-चिल्लाते रहेंगे, बाकी जिन पर इस देश को संवारने का ज़िम्मा है, वे अपना घर, भाई, भतीजे संवार रहे हैं. सच की आवाज़ हमेशा दबाई जाती रहेगी, सच की छाती पर गोली दागी जाती रहेगी. गाँधी जीवित होत्ते तो देश के हालात देखकर उन पर क्या बीतती, सिर्फ अनुमान लगाया जा सकता है. कविता की प्रशंसा न करूं तो शायद बेईमानी होगी.

ज्योति सिंह ने कहा…

shama ji bahut shaandar aur sundar bhav se bhari hui rachana hai .
ना लूटो , अस्मत इसकी,
ये है धरती माँ मेरी,
मै संतान इसकी,
क्यों है ये रोती?
सोचा कभी?
ना लूटो...
sahi kaha aapne ,aapke kavita wale blog par do baar gayi wo blog hi gayab nazar aaya .ye baat vanana ji se bhi kahi par wo boli aesa nahi ho sakata aur aaj bhi wahi samsaya bani hai ,lekin jo hota hai achchha hota nahi to ye miss kar jati .blog par yadi aaye to chand siskta raha jaroor padhiyega bhale tippani na de phir bataungi kyo ?

VIJAY TIWARI " KISLAY " ने कहा…

वर्तमान परिवेश में देश के हालत, समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व और गिरते नैतिक मूल्यों पर क्षोभ प्रकट करती रचना.
सच क्या ऐसा परिवर्तन संभव है जब हर आदमी में मानवीय संवेदनाएं पुनः अंकुरित हों और अपने अस्तित्व से समाज में जागृति ला पायें.
- विजय

RAJ SINH ने कहा…

बहुत सही कहा . सवालों के घेरे में गांधी और शहीद नहीं हम हैं .सिर्फ पलायन वादी नाकारे ही उन पर सवाल उठा सकते हैं .

Ismat Zaidi ने कहा…

gandhiji par nakaratmak tippani karne wale log samajh hi nahin sakte ki wo kya the .ek sundar rachna.