मंगलवार, 29 सितंबर 2009

"क्या हैं भावना"

मन में एक सवाल तब उठा जब मेरे रूम पार्टनर ने मुझसे कहा "क्या हैं भावना" भावना कुछ नहीं होती हैं | जब हमें अपना उदेश्य साधना होता है तो हम सारी भावनाओं को दरकिनार कर देते हैं |
मैं सोचने पर मजबूर हो गया की ये सख्स जो मुझसे कह रहा है भावना क्या है भावना कुछ नहीं होती, अगर ऐसा होता की मनुष्य के दिल में भावना न होती तो कितना अनर्थ हो जाता | अपने स्वार्थ के लिए फिर मनुष्य कुछ भी कर सकता था | मनुष्य पत्थर्वत होता | अब मुझे लगता है की जो लालच के बस आते हैं उनकी भावना मर जाती है या मार देते हैं तभी दहेज़ उत्पीडन जैसी वारदातें होती हैं | जब दिल में भावना ही नहीं हैं तो बेबस लाचार की दुहाई और कराह की क्या बिसात ? लोगों को बेमौत मार देना, कई वारदातें ऐसी होती हैं की दिल दहल जाता है बहुत ही वहसीयाने तरीके से, तो क्या जो ऐसे कु-कृत्यों को अंजाम देते हैं उनमे भावना होती है ? क्या आपको नहीं लगता की भावना की कमी के कारण ही बेबस और लाचारों की दुदशा होती है ??

5 टिप्‍पणियां:

Nirmla Kapila ने कहा…

भावना भगवान दुआरा मनुश्य जाति को दिया गया वरदान है जो आदमी को सही इन्सान बनाता है भाव बिना सब निर्जीव है भावना है तभी प्रेम प्यार्र करुणा सुख दुख दया ममता दुख सुख है अगर भावनायें न हों तो तो आज माँ की महिमा न होती मममता वातसल्य की भावना ही मा को बच्चे के लिये इतने दुख सहने की हिम्मत देती है। आज भावनायें मर रही हैं आदमी प्रेक्टीकल होता जा रहा है इसी लिये समाज मे इतनी बुराईयां पनप रही हैं। शुभकामनायें

shama ने कहा…

भावुकता लुप्त नही हो रही , लेकिन लोग संवेदन हीन से हो रहे हैं ...किसी के पास 2 पल इस आपाधापी में ठहर जानेका समय नही ..
मै भावुक हूँ , practical होना ग़लत नही ...भावुकतामे बह न जाने को मै 'practical' कहती हूँ ..या emotional intelligence..ज़िंदगी में अधिक मनमुटाव स्व केंद्रित भावुकता से होते हैं ...ज़िंदगी का हर दिन गर हम,किसी ना किसी के प्रती रूठने या गुस्सेमे बिता दें तो सोचें कितना समय बरबाद करते हैं ..वो भी छोटी छोटी बातों पे ..गुस्सा करते समय भी मनमे अगले के प्रती करुणा सहानुभूती हो तो वही emotional intelligence है..जैसे एक माँ अपने बच्चे को डांट देती है...

http://shamasansmaran.blogspot.com

http://baagwaanee-thelightbyalonelypath.blogspot.com

http://aajtakyahantak-thelightbyalonelypath.blogspot.com

Science Bloggers Association ने कहा…

आपका कहना जायज है।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Sunita Sharma ने कहा…

जिन लोगों में भावनायें नही होती मै उन्हे इन्सानों की
श्रेणी में नही रखती। read my blog for Emotion's http://swastikachunmun.blogspot.com

ज्योति सिंह ने कहा…

bhavnao me bahane wale aksar taklife uthate hai ye lagbhag sahi hai ,yahi wazah hai aaj log apne se ise door kar rahe hai .shama ji aapne jo link diya tha kavita wali blog ka wo khool nahi raha .aur aapke kala se jude blog bhi nahi dikh rahe jo mujhe behad pasand hai .