शनिवार, 26 सितंबर 2009

इंसान क्या इंसान जैसा है ??

सवाल सचमुच बहुत है, कुछ कानूनी कुछ इंसानी, खैर कानून की बात करें तो भ्रष्टाचार की गिरफ्त में हर कोई फस चुका है | बात करते हैं इंसानी सवालों की, जो हमारे बस में है, जो हम कर सकते हैं|
मानव इस प्रकृति की सबसे सुन्दर रचना है, जो प्रेम सोहार्द ,भावाना सब कुछ समझता है, और सबसे बलवान है| बलवान को निर्बल से हमेशा प्यार भरा व्यवहार करना चाहिए ये भावनात्मक विवेक कहता है ,पर क्या निरीह और बेजुबान प्राणियों के साथ इंसान प्यार से पेश आता है ?? जैसे चाहता है वैसे किसी भी जानवर को मारता है | "बीफ" बनाने के ऐसे ऐसे तरीके हैं की दिल दहल जाता है, गाय के छोटे बछडे को जो की २-३ महीने का होता है उसे भूसे का पानी खिला खिला के जिंदा रखा जाता है, यानी उसे तिल तिल करके मारा जाता है, ताकि उसका कलेजा किसमिस की तरह हो जाय | फिर उसके कलेजे को महंगे भाव में बेचा जाता है | हम बात करते हैं सिर्फ अपनी " इंसानों" की पर इंसान क्या इंसान जैसा है ??

6 टिप्‍पणियां:

shama ने कहा…

'इंसान ' केवल पशुओं के साथ नही अन्य इंसानों के साथ भी यही व्यवहार करता है ...जो बलवान वही सही , यही कहावत है ..बलात्कार और क्या है? जिसके जिस्म पे अधिकार नही वहीँ ज़बरन अधिकार दिखाना...और नही तो क्या है? और इंडियन क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की धज्जियाँ उडाता हुआ एक विज्ञापन देखा है? ग्रीन ply का? न देखा हो तो गौर करें...एक बलात्कारी का केस कितने साल चल सकता है ,पता चलेगा..जज ,वकील और पीडिता...सभी जवानी से बूढे हो jaate हैं..'चलता ही रहे चलताही रहे..."! ye breed waky hai...

SACCHAI ने कहा…

" shamaji ki baat se mai sahmat hu ...accha sawal aur is sawal ke liye aapko badhai "

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

http://hindimasti4u.blogspot.com

चाहत ने कहा…

आपने सही कहा है इंसान क्या इंसान जैसा है
मुझे लगता है कि इंसानियत कहीं खोती जा रही है
हम भुल रहें हैं अपनी प्रक्रिती को
हमारा फर्ज है कि हम पशुओं की रक्षा करें न कि उन्हें नाश करें।

Udan Tashtari ने कहा…

सच बात..हरकतें देखकर यही लगता है.

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

कुछ बदलाव तो ज़रूर आ गया है..
सच की ओर जाती आपकी यह रचना..बधाई..

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

इन्सानियत तो कब की समाप्त हो चुकी है....अब तो सिर्फ इन्सानियत के अवशेष भर बचे हैं!!!