सोमवार, 24 अगस्त 2009

पर्यावरण पर चिंतन ???...

चारों ओर प्रदूषण का डर ।
थोड़ा सोचें अपने अन्दर ॥
वृक्ष लगायें, कटें न वन ।
करें न दूषित, धरा-गगन ॥

इनको दोस्त बनाना होगा ।
पर्यावरण बचाना होगा ॥
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मन-भावन हरियाले वन ।
निर्मल जल, स्वच्छंद पवन ॥

निर्भय प्राणी करें गमन ।
करें न इनका, कभी हनन ॥

रुख कठोर अपनाना होगा ।
हरित स्वरूप बचना होगा ॥
----))०((---
हम सबका हो यही प्रयास ।
कभी न हो जंगल का ह्रास ॥

सृष्टि का ये सृजन अनूप ।
कर न पाये कोई कुरूप ॥

रक्षा भाव जगाना होगा ।
वन अस्तित्व बचना होगा ॥
- विजय तिवारी " किसलय "

4 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

पर्यावरण संरक्षण की नसीहत देती एक उम्दा रचना. साधुवाद!!

shama ने कहा…

पर्यावरण की रक्षा ,आज हम सबका दायित्व बनी है ..

बेहद प्रभावकारी शैली में आपने ख़यालात पेश किए हैं ..तहे दिलसे शुक्रिया !

http://chindichindi-thelightbyalonelypath.blogspot.com

इस ब्लॉग पे इस सम्बंधित कुछ सुझाव पेश किए हैं..जैसे, कागज़ तथा, प्लास्टिक का कमसे कम इस्तेमाल..और 'recycling' के तौर तरीके..

KNKAYASTHA "नीरज" ने कहा…

पर्यावरण पे आपने एक बहुत ही सटीक रचना की है... इसका संरक्षण और विस्तार हमारा ही दायित्व है क्योंकि इसका यह हाल हमारी ही गलतियों और लोभ के कारण हुआ है.... और यदि इसे सही नहीं किया गया तो हमें ही इसका दुष्परिणाम झेलना होगा...

इस मुद्दे को उठाने के लिए धन्यवाद...

SACCHAI ने कहा…

umdaa rachana hai ... besak hume paryawaran ko bachana chahiye

-----eksacchai {AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com