मंगलवार, 18 अगस्त 2009

अर्थी तो उठी...

चंद वाक़यात लिखने जा रही हूँ...जो नारी जीवन के एक दुःख भरे पहलू से ताल्लुक़ रखते हैं....ख़ास कर पिछली पीढी के, भारतीय नारी जीवन से रु-ब-रु करा सकते हैं....

हमारे मुल्क में ये प्रथा तो हैही,कि, ब्याह के बाद लडकी अपने माता-पिता का घर छोड़ 'पती'के घर या ससुराल में रहने जाती है...बचपन से उसपे संस्कार किए जाते हैं,कि, अब वही घर उसका है, उसकी अर्थी वहीँ से उठनी चाहिए..क्या 'वो घर 'उसका' होता है? क़ानूनन हो भी, लेकिन भावनात्मक तौरसे, उसे ऐसा महसूस होता है? एक कोमल मानवी मन के पौधेको उसकी ज़मीन से उखाड़ किसी अन्य आँगन में लगाया जाता है...और अपेक्षा रहती है,लडकी के घर में आते ही, उसे अपने पीहर में मिले संस्कार या तौर तरीक़े भुला देने चाहियें..! ऐसा मुमकिन हो सकता है?

जो लिखने जा रही हूँ, वो असली घटना है..एक संभ्रांत परिवार में पली बढ़ी लडकी का दुखद अंत...उसे आत्महत्या करनी पडी... वो तो अपने दोनों बच्चों समेत मर जाना चाह रही थी..लेकिन एक बच्ची, जो ५ सालकी या उससे भी कुछ कम, हाथसे फिसल गयी..और जब इस महिलाने १८ वी मंज़िल से छलाँग लगा ली,तो ये 'बद नसीब' बच गयी... हाँ, उस बचने को मै, उस बच्ची का दुर्भाग्य कहूँगी....

जिस हालमे उसकी ज़िंदगी कटती रही...शायद उन हालत से पाठक भी वाबस्ता हों, तो यही कह सकते हैं..
ये सब, क्यों कैसे हुआ...अगली किश्त में..गर पाठकों को दिलचस्पी हो,तभी लिखूँगी...क्योंकि, यहाँ एक सँवाद हो रहा है..बात एक तरफ़ा नही...आप सवाल करें तो मै जवाब दूँ...या मै सवाल खड़ा करूँ,तो आप जवाब दें!

10 टिप्‍पणियां:

नीरज कुमार ने कहा…

शमा जी,
बहुत दुखद घटना की आपने चर्चा की है..
यह कब, कहाँ और क्यों हुआ...
विस्तार से बताएं...

shama ने कहा…

नीरज जी ,
मै विस्तार से तो ज़रूर बता दूँगी , लेकिन जैसे मैंने कहा ,ये एक प्रश्न मंच है ..... एकतरफा लेखन नही चाहती .. गर और प्रतिक्रिया नही मिलती,तो आपको उस दास्ताँ के बारेमे अलग से लिख दूँगी..!

अर्चना तिवारी ने कहा…

अत्यंत दुखद घटना...आगे विस्तार से जानना चाहूंगी...कृपया बताएँ

Kamal Nayan Das ने कहा…

Shama ji,
Aapne bahut hi bhayavah ghatna bataaee jara vistaar se batayen...vaise shayad aisi ghatna har gali-mohalle men hoti hai...lekin ham jawan log itne simat gaye hain jindagi men ki kuchh pata hi nahin chalta paas-pados men kya hota hai...dhanywaad

Anjana ने कहा…

Dukhad ghatna hai...lekin ham yaa koi kya kar sakta hai...samaj ko poora badalna asambhav hai...main bhi jaanti hun kya kya hota hai hamare saath sadak par to kam gharon men jyadaa...thik hai aap blog se kuchh karna chah rahi hain... lage rahiye...

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

संगीता पुरी ने कहा…

इस ब्‍लाग में अभी तक अधिकांश आलेख आपके द्वारा ही प्रकाशित हुए है .. जानकर अच्‍छा लगा .. पर आज की घटना सुनकर मन दुखी हुआ .. कहां की घटना है .. सचमुच उत्‍सुकता बन गयी।

Sunita Sharma ने कहा…

क्या आैरत अपने हिस्से में सिफ दुर:ख ही लिखा कर लाती है। आपकी पोस्ट पढने से पता चला पर क्या इन सब की जड में बेमेल विवाह तो उत्तरदायी कारण नही जिसकी नियति उस विवाह उपरान्त जन्में बच्चों को भुगतनी पडती है।

बेनामी ने कहा…

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बेनामी ने कहा…

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