बुधवार, 12 अगस्त 2009

एक बात है मन में...

कई बातें मन में एक सवाल खड़ा कर देती हैं...ऐसा क्यों हुआ..वैसा क्यों नही हुआ...? गर ऐसा होता तो...!
इसी लिए आमंत्रण है दोस्तों को...के पर्यावरण,या फिर अपने समाज और देशसे निगडित सवाल और जवाबों का सिलसिला शुरू हो...

इसका एक और विभाग बनेगा:" आईये हाथ उठायें हम भी..."...इसमे सकारात्मक सुझाव दिए जा सकते हैं...जो लाभदायक हों देश के लिए समाज के लिए..तथा क़तई 'blame game' ना हो..जो हम एक जुट होके या अपने आप से कर सकते हैं, वही सुझाव रहें..

नाही अन्य ब्लॉगर दोस्तों पे टीका टिप्पणी।

आशा करते हैं, इसमे दोस्तों का योगदान ज़रूर मिलेगा!

4 टिप्‍पणियां:

चंदन कुमार झा ने कहा…

चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.

गुलमोहर का फूल

विपिन बिहारी गोयल ने कहा…

सुंदर

तेज धूप का सफ़र

gargi gupta ने कहा…

आप की रचना प्रशंसा के योग्य है . आशा है आप अपने विचारो से हिंदी जगत को बहुत आगे ले जायंगे
लिखते रहिये
चिटठा जगत मे आप का स्वागत है
गार्गी

VIJAY TIWARI " KISLAY " ने कहा…

शमा जी
एक खुले और यथार्थ विचारणीय मंच में हम आपके साथ अहीं.
- विजय